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| ये कैसी दोस्ती है ye kaisee dostee hai |
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जून 20, 2021
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तो दोस्तो जैसा की आप लोगो ने ये कैसी दोस्ती है के पार्ट 1 में पढ़ा होगा की राजा अपनी एक दुकान खोल लेता है और उसकी दुकान चलने लगती है और वो अपने परिवार के साथ बहुत खुशी खुशी जिंदगी बिताने लगता है लेकिन क्या है न दोस्तो। हराम की कमाई जादा दिनों तक नहीं रुकती।
तो राजा के साथ भी ऐसा ही होता है एक रात अचानक से उसकी दुकान में चोरी हो जाती है उसे 50000 रुपए का नुकसान हो जाता है राजा बहुत परेशान हो जाता है की अब मेरे काम का क्या होगा। तभी उसकी पत्नी आती है और उसे अपना जेवर देती है और कहती है इसे बेच कर अपने काम में लगा लो। और पुलिस के पास इसकी एक कम्प्लेन करा दो जिससे ओह चोर जल्दी पकड़ा जा सके। राजा पहले तो जेवर लेने से मन कर देता है लेकिन उसकी पत्नी कहती है जेवर तो होते हैं बुरे समय में काम आने के लिए।
वो मुस्कुरा कर अपनी पत्नी का जेवर लेकर जोहरी के पास जाकर बेच देता है। लेकिन उसे इस बात का बुरा भी लगता है की उसने अपनी पत्नी जावेर बेच दिया है
गावं में पुलिस नहीं था इसलिए अब ओह गांव के बाहर पुलिस के पास जाने लगता है जाते जाते रात हो जाती है अब उसको थकान भी महसूस हो रही थी उसको एक पेड़ दीखता है ओह पैसला करता है यहाँ रुक कर थोड़ा आराम कर ले ओह पेड़ के पास जाकर बैठ जाता है तभी तेजी से हवा चलने लगती है और मौसम बिगड़ने लगता है।
तभी उसे कोई अपनी ओर आते हुआ दिखाई देता है करीब आने पर उसे देख कर वो हैरान हो जाता।
बोलता है तुम तुम अभी जिंदा हो और वो इंसान कोई और नहीं बल्कि उसका दोस्त छोटू रहता है फिर छोटू धीरे धीरे उसके और पास आ जाता है राजा को डर लगने लगता है। छोटू राजा से कहता है की राजा सुनो मैं तुम्हे मारने नही आया हूँ। मुझसे डरो नहीं मैं कोई आत्मा नहीं हूँ। मैं तुम्हारा मित्र छोटू ही हूँ
तुमने तो मुझे मारा हुआ समझ कर सरकार के पास छोड़ दिया था लेकिन मैं जिन्दा था बहुत दिनों के बाद कोमा से निकला हूँ तुम्हे पता है मुझे अच्छी जॉब भी मिल गयी है। मैने एक घर भी खरीद लिया है अब मुझे किसी चीज की कोई परेशानी नहीं। मैं तुमसे मिलने गाँव ही जा रहा था की मैंने तुम्हे इस पेड़ पास बैठे देखा
लेकिन तुमने अपने बारे में कुछ नही बताया क्या हुआ इतने परेशान क्यू नजर आ रहे हो बोलो। राजा छोटू मुझे माफ़ कर दो मेरे पास कोई रास्ता नहीं था घर की जिम्मेदारी थी मुझे अपनी फॅमिली के साथ रहना था इस लिए मैंने ऐसा किया मुझे माफ़ कर दो |
छोटू परेशान तो मैं भी था लेकिन मैंने तुम्हारे बारे ऐसा कुछ नहीं सोचा। मुझे गलती हो गयी थी लेकिन मैं अपनी गलती दुबारा तुम पर भरोषा करके दोहराना नहीं चाहता इतना कहकर छोटू जाने लगता है लेकिन राजा का चेहरा उसकी आँखों के सामने आने लगता है ओह बहुत परेशान था क्या हुआ होगा राजा क्यों परेशान था ये सोचकर ओह राजा के पास वापस आता है और पूछता है क्या हुआ तुम इतना परेशान क्यों हो कुछ हुआ है क्या मैं ये सिर्फ तुम्हारी फॅमिली वजह पूछ रहा हूँ सब ठीक है न घर पर।
फिर राजा रोते रोते बोलता छोटू बहुत बड़ा नुक्सान हो गया उन 5000 रुपए की एक छोटी सी दुकान खोली थी लेकिन कल रात मेरी दुकान में चोरी हो गई और 50000 रुपए का नुकसान हो गया है उसी के लिए पुलिस स्टेशन जा रहा था तब छोटू ने कहा देखा बुरे काम का बुरा नतीजा ही होता है हुआ ना तुम्हे नुकसान
हमने ने क्या सोचा था और तुमने क्या किया था मेरे साथ तुम्हारे साथ ऐसा ही होना चाहिए था . मुझे लगा की तुम्हारी फैमिली के साथ कुछ हुआ है इस लिए पूछा था अब मैं चलता हूं अपने घर तुम अपने कर्मो की सजा खुद ही भुक्तो इतना कह कर छोटू वहा से चला जाता है
छोटू रात भर सोचता रहता की राजा मेरा दोस्त था पहले ही सही उसकी वजह उसकी फॅमिली को भी परेशान होना पड़ेगा ये मुझसे नहीं होगा ,मुझे उसकी मद्दत करनी पड़ेगी दूसरे दिन छोटू राजा के घर चला जाता है और उसे 50000 रुपए देता है और कहता है मैं नहीं चाहता की तुम्हारी फॅमिली तुम्हारी वजह से परेशान हो | राजा सोचता है जिसे मैं मारने की कोशिश कर रहा था आज उसी ने मेरी इस बुरे समय में मेरी मददत की .
पैसे देकर छोटू वहां से चला जाता है .
राजा को बुरा लग रहा था की मैंने ऐसा क्यों किया सोचते सोचते ओह इतना बुरा महसूस करने लगा की उसने आत्महत्या की सोचली और एक खत लिखता जिसमे सारी सच्चाई लिख कर चला जाता है खत उसकी पत्नी को मिलता ओह बहुत परेशान हो जाती और छोटू के पास भाग कर जाती है और सारी बात उसको बता देती है अब मैं उनको कहाँ तलाश करो पता नहीं कहाँ गए होंगे छोटू मैं जनता हूँ ओह कहाँ गया होगा आप परेशान न हों भाभी मैं उसे जरूर लेकर आऊँगा छोटू भागता हुआ उसी तालाब के पास जाता है राजा वही खड़ा था ओह तालाब में कूदने ही वाला था की छोटू उसे पकड़ लेता राजा तू ये क्या करने जा रहा था तूने कभी सोचा है तेरे बाद तेरे घर वालो का क्या होगा
राजा नहीं मैं तेरा गुनेगार हूँ मुझे मर जाना चाहिए मुझे जीने का कोई हक़ नहीं मुझे मरने दो छोटू मैंने तुघे माफ़ कर दिया है अब चल राजा सच छोटू हाँ कोई अपने दोस्त कब तक नाराज़ रह सकता है दोनों गले मिलते हैं और खुसी खुसी घर आ जाते हैं और पहले की तरह साथ रहने लगते हैं
इसी के साथ हमारी ये कहानी यही पर खतम होती है
तब तक के लिए धन्यवाद😊
Author:- Mohd Adnan
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